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International Advanced Research Journal in Science, Engineering and Technology
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ISSN Online 2393-8021ISSN Print 2394-1588Since 2014
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भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों में योग की भूमिका

डॉ. कीर्ति कुमार त्रिपाठी, प्रतिभा नीरत

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सारांश:
योग दर्शन भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का सजीव स्वरूप है। यह व्यक्ति को केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक विकास की ओर भी मार्गदर्शन करता है। आधुनिक युग में योग संस्कृति के संरक्षण और पुनर्जीवन का माध्यम बन गया है, जो युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ता है। योगमय मूल्यों से युक्त प्रजा ईश्वर के आदर्श का अनुसरण करते हुए अपने निर्णय प्रस्तुत करती थी। इसके विपरीत यदि राजा स्वयं भ्रष्ट हो जाता था, तो प्रजा उसका विरोध करती थी और अंततः उसका पतन होता था। एक सक्षम प्रशासक योग-साधना के माध्यम से नीति का अनुसरण करता है। यही सच्चे शासक और प्रजापालक का गुण है। प्रजा के कल्याण की रक्षा करना शासक का सर्वाेपरि कर्तव्य माना गया है। जब नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, शिक्षा, न्याय तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, तब अनुशासन और तपस्या के माध्यम से उनका आचरण संतुलित हो जाता है। राजनीतिक मूल्यों में योग की नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा, न्याय, सत्यनिष्ठा, अहिंसा तथा इसी प्रकार के सिद्धांतों को महत्वपूर्ण साधन माना गया है। जब किसी राष्ट्र में वैचारिक क्रांति उत्पन्न होती है, तब सामाजिक विषमताएँ उसी प्रकार परिवर्तित होने लगती हैं जैसे मानव जीवन स्वयं परिवर्तित होता है। समाज में विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के प्रयास में अनेक भ्रांतियाँ उत्पन्न होती हैं। इन आवश्यकताओं की पूर्ति करना एक राजनीतिक सिद्धांत है। प्रत्येक व्यक्ति के अनेक कर्तव्य होते हैं, जिनमें से कुछ का निर्वहन प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। राष्ट्र के प्रति सम्मान, सुरक्षा, देशभक्ति और त्याग की भावना महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं। प्रत्येक नागरिक को समाज और राष्ट्र में होने वाली गतिविधियों के प्रति सजग रहना चाहिए। इसलिए राष्ट्र को सशक्त और वास्तव में चरित्रवान प्रशासकों की आवश्यकता होती है।   संस्कृति मनुष्य के जीवन जीने की पद्धति है। क्रिया योग जैसे योगिक गुण शारीरिक स्फूर्ति प्रदान करते हैं और मानव विकास के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। प्रत्येक समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति होती है।

मुख्य शब्द: नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा, न्याय, सत्यनिष्ठा, अहिंसा आदि। 

How to Cite:

[1] डॉ. कीर्ति कुमार त्रिपाठी, प्रतिभा नीरत, “भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों में योग की भूमिका,” International Advanced Research Journal in Science, Engineering and Technology (IARJSET), DOI: 10.17148/IARJSET.2026.13732

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